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Showing posts from October, 2020

PAKODE , INSTAGRAM AUR SAAS

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                   पकोड़े बनाते हुए मैंने बस अभी एक पकोड़ा मुँह के अंदर लिया ही था कि  माँ की पीछे से फटकार वाली आवाज़ आयी | " हाँ हाँ सब जूठा कर दो , सास क्या कहेगी माँ ने कुछ धरम करम नहीं सिखाया |" मैंने भी बड़ी बेफिक्री में बोला , "कौन सा सारे खा लिए हैं मैंने बस एक चखा ही तो है और वैसे भी सबरी के बेर जब जूठे नहीं बल्कि उनके प्रेम का  प्रतीक थे तो ये जूठा कैसे हुआ ?" मेरी इस बात पर माँ ने नाउम्मीदी भरी एक लम्बी साँस अंदर ली और फिर बाहर छोड़ी |  मैं वापिस अपनी धुन में |                      आज कल रोटी कपड़ा और मकान के साथ साथ इंटरनेट भी जीवन की मूलभूत आवश्यकता और उस पर भी इंस्टाग्राम, फेसबुक और तमाम सोशल नेटवर्किंग साइट्स जिनपे  दिन भर में एक दो पोस्ट या स्टोरी डालना दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा | मैंने भी बस अपने पकोड़ो की लुभावनी और मुँह में पानी लाने वाली शक्ल को बुमररेंग में तब्दील करने के  लिए बस मो उठाया ही कि...

DARIYA

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                               मैं दरिया हूँ | शांत हूँ सारे गांव की प्यास बुझाने का ज़रिया हूँ | जन - जन  की हंसी ठिठोली का हिस्सा हूँ , रीति - रिवाज़ , पूजा - पाठ का किस्सा हूँ | हरी नीली जलपरियों के जीवन का उत्तरदायी भी मैं हूँ |                वाक़या कुछ यूँ हुआ, निलिनी नीली सुनहरी  नन्ही जलपरी मात्र कुछ ही महीने पहले की पैदाइश , नादान , मासूम , अबोध , कुटिल मनुष्य के कृतघ्न कृत्य से अंजान , पॉलीमर पदार्थ का सेवन कर बैठी | उसकी दर्द भरी चीखें , मृत्यु के निकट फड़फड़ाता शरीर और इस घटना की श्रृंखला का चश्मदीद होना मेरी विवशता की पराकाष्ठा |  उसके अश्रुओं और पार्थिव शरीर को खुद में समाहित कर लेना मेरी नियति |                हे मानव या मनुष्य रूपी दरिंदा कहु तुझे ? अपने स्वार्थ में डूबा , प्रकृति के नियमों को रौंदता , अपने वर्चस्व के घमंड में चूर , मूर्ख , तिनके से ना अधिक अस्तित्व वाला | ...

Society or Factory ?

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                                             After listening, also discussing and even witnessing a lot of debates about unemployment , poverty , unskilled labour , mediocrity , there is a question in my mind, "If every person is different then how are these lines of thousands of aspirants seeking of a single job formed? How one single job is adequate or suitable for all or vice versa ?"               When an infant comes in this beautiful world filled with colours , sounds , light and so many versatilies then he is same as nature,  pure and full of possibilities . As seed just sowed in soil and put in the contact with sunlight . Suppose if we close our plant in a box and create a hole in the box for entrance of sunlight then we find plant start growing or bending in the direction of sun. It's g...