DARIYA
मैं दरिया हूँ | शांत हूँ सारे गांव की प्यास बुझाने का ज़रिया हूँ | जन - जन की हंसी ठिठोली का हिस्सा हूँ , रीति - रिवाज़ , पूजा - पाठ का किस्सा हूँ | हरी नीली जलपरियों के जीवन का उत्तरदायी भी मैं हूँ |
वाक़या कुछ यूँ हुआ, निलिनी नीली सुनहरी नन्ही जलपरी मात्र कुछ ही महीने पहले की पैदाइश , नादान , मासूम , अबोध , कुटिल मनुष्य के कृतघ्न कृत्य से अंजान , पॉलीमर पदार्थ का सेवन कर बैठी | उसकी दर्द भरी चीखें , मृत्यु के निकट फड़फड़ाता शरीर और इस घटना की श्रृंखला का चश्मदीद होना मेरी विवशता की पराकाष्ठा | उसके अश्रुओं और पार्थिव शरीर को खुद में समाहित कर लेना मेरी नियति |
हे मानव या मनुष्य रूपी दरिंदा कहु तुझे ? अपने स्वार्थ में डूबा , प्रकृति के नियमों को रौंदता , अपने वर्चस्व के घमंड में चूर , मूर्ख , तिनके से ना अधिक अस्तित्व वाला | चेतावनी देता हूँ तुझे - अपने महत्वाकांक्षी स्वरुप को लगाम दे | तू मात्र एक जीव है ये जान ले | ना मेरे सब्र का इम्तेहान ले | ये शांत लहरें अब तूफ़ान बनने को आतुर हैं |

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